समाज

मानवता का आधार धर्म और धर्म का आधार समाज
समाज के स्तम्भ: धार्मिकता, समाजिकता, सरकार व विकास.
धार्मिकता का आधार: संस्कृति, आस्था, संत व नारी.
धार्मिक आयोजन की भरमार है.
आस्था में आडम्बर नहीं प्रज्ञा जरूरी है.
समाजिकता का आधार: सभ्यता, शिक्षक, शिष्य व शिक्षा.
समाज सुधारकों की फौज है.
शिक्षा में रूढ़िवादिता नहीं ज्ञान जरूरी है.
सरकार का आधार: न्यायपालिका, विधायिका, कार्यपालिका व मिडिया.
सभी में स्वार्थ शिखर पर है.
राजनीति में महत्वकाँक्षा नहीं निष्ठा जरूरी है.
विकास का आधार: वैज्ञानिक, व्यापारी, किसान व मजदूर.
विकास की अंधी बेरहम दौड़ में स्पर्धा चरम पर है.
विकास में स्वार्थ नहीं कर्मठता जरूरी है.
प्रज्ञा व बुद्धि के बाणों से घायल मानवता मृत्यु शैया पर है और ज्ञान व विचार का मरहम लगाया जा रहा है.
प्रश्न : क्या मानवता का अस्तित्व खतरे में है?
नमस्कार 🙏

thoughtoftheday

मानव और ब्रह्माण्ड का रिस्ता

रचियता को अपनी रचना से प्यार है, इसीलिए इसमें इतनी सुंदरता, स्थिरता और आनंद है. रचियता के पास अब कोई शक्ति नहीं है क्योंकि उसने अपनी रचना को सब कुछ दे दिया है, अब प्रत्येक प्रतिक्रिया रचना की क्रिया में ही निहित है. रचना में ही रचियता ने अपने को स्थित किया है. ब्रह्मांड में नकारात्मक, सकारात्मक और अनवेशित उर्जा गुण हैं. ब्रह्मांड का नियम निरपेक्ष, आकाशगंगा (Galaxy) सापेक्ष है परन्तु उसका अंतिम परिणाम ब्लैक होल है. उसी तरह से हर जीवित प्राणी में नर, मादा और किन्नर गुण होते हैं. समाज के नियम में आस्तिक, नास्तिक और अंधविवासी होते हैं. यहाँ से शुरू हुआ मानव का पूजा, प्रार्थना व शैतानीयत का खेल.
प्रश्न : क्या मानव क्रिया की प्रतिक्रिया नकारात्मक होगी?
नमस्कार 🙏

universe

Reincarnation

The scientists and sages of Sanatan culture believed that salvation is the final biological stage of an evolved human. Salvation, that is, liberation, is the proof of Sanatan culture that at the mental level, human is the pinnacle of the evolution of life. The concept of 84 lakh species has been presented only by Sanatan culture. The process of creation of a single cell organism (Natural Selection) continues in nature every day. Our ancestors had counted all the organisms of their era, but today’s science cannot decide how many organisms are present on earth today. The Sanatan sages believed that according to the deeds of a human, after death, he has to go through all the species of a living being. Considering the human species to be the best, they imagined that they did not want to get trapped in this cycle anymore. They considered leaving Brahma in the proximity of cosmic energy to be the best deed, this state is the concept of salvation. To save humans from negative deeds and thoughts, they related it to Dharma Karma.  Question: Is salvation a hypothesis or the ultimate reality of life?
Namaskar 
#kumbhmela2025
#creatortruthlove
#amobea

Young women

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Brain Power is unlimited and unpredictable.

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God Truth Love

भगवान, सच और प्यार दुनिया के सबसे अधिक प्रयोग किये जाने वाले शब्द हैं. आधुनिक दुनिया में धार्मिक, सामाजिक, राजनैतिक और आर्थिक क्षेत्र में इन शब्दों का प्रयोग सुविधानुसार किया जा रहा है. आर्थिक दुनिया में प्राथमिकता पैसा है और आस्था परिवर्तनशील रहती है. भगवान और देवता भी व्यापार के उतार चढ़ाव के साथ बदल सकते हैं. सच तो बहूत दयनीय अवस्था में रहता है यहाँ झूठ को सच की तरह सजाया जाता है. प्यार तो पूरी तरह व्यवसायिक हो गया है ज़ब व्यापार में फायदा होता है तो उपहार देकर व्यक्त कर दिया जाता है, अगर नुकसान हुआ तो निराशा भरी झिड़की या क्रोध से मुठभेड़ होती है. धर्म, समाज और सत्ता में तो ये शब्द पूर्णतः शोषण के हथियार बन चुके हैं.
प्रश्न : क्या ये शब्द आधुनिकता की अंधी दौड़ में अर्थहीन हो रहे हैं?
नमस्कार 🙏

thoughtoftheday

creatortruthlove

भविष्यवाणी

कुछ भविष्यवाणी आश्चर्यजनक हैं.

Hindu

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हिंदू मानसिकता इस संघर्ष के बिंदु से आगे नहीं बढ़ पायी है कि बुद्धिमान कौन है? अब उनका ज्ञान स्थिर हो गया है कि कौन सही है. कुछ पंथ बुद्धि के बिना आगे बढ़ रहे हैं, सिर्फ इसलिए कि उनकी किताब एक विचारक द्वारा लिखी गई है जिसने मानव व्यवहार का सटीक अध्ययन किया था. अगर एक अक्लमंद आदमी एक कमअक्ल का शोषण कर सकता है तो कमअक्ल आदमी अक्लमंद को भी सामान्य क्रिया से बेवकूफ बना सकता है. अब ज्ञान के साथ प्रज्ञा के अनुसार जीने का समय आ गया है. *प्राकृतिक क्रम व प्रवृत्ति के साथ योग्यतम की उत्तरजीविता*

प्रश्न : क्या 1947 कि आजादी भारतीय संस्कृति व सभ्यता के साथ खिलवाड़ थी?